بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ अगर आप क़ुरआन और हदीस को ध्यान से पढ़ते हैं, तो एक सवाल स्वाभाविक रूप से सामने आता है— क्यों कुछ गिने-चुने नंबर बार-बार आते हैं? ख़ास तौर पर 7, 70, 700 और 70,000, जबकि 35, 65, 82 या 91 जैसे नंबर लगभग कहीं नज़र नहीं आते। आज का आधुनिक पाठक, […]

