"क्या तुम अपने रसूल (मुहम्मद ﷺ) से वैसे ही सवाल करना चाहते हो जैसे पहले मूसा से किया गया था? [213] और जो कोई ईमान को कुफ़्र से बदल दे, वह यक़ीनन सीधी राह से भटक गया है। [214]"
🔍 इससे दो बातें सामने आती हैं:
🗣️ सबक़:
कम बोलो, ज़्यादा अमल करो — क्योंकि ज़्यादा बोलने वाले अक्सर अमल से खाली होते हैं।
➡️ ऐसे तकब्बुर वाले रवैये इस्लाम में नापसंद हैं।
👉 जो शख़्स ईमान को कुफ़्र से बदल लेता है, यानी ग़लत सोच और अहंकार के चलते हक़ को ठुकराता है —
वो सीधे रास्ते से दूर चला जाता है, चाहे उसकी बातें कितनी भी "अक़्लमंदी" जैसी क्यों न लगें।
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सूरह अल-बक़रा आयत 108 तफ़सीर