130.और कौन इब्राहीम के धर्म से फिर सकता है, सिवाय उसके जिसने खुद को मूर्ख बनाया हो? निश्चय ही, हमने उसे इस दुनिया में चुना है, और निश्चित ही वह आख़िरत में भी नेक लोगों में से होगा [264]।
📖 सूरह अल-बक़रह – आयत 130 का तफ़सीर
"और कौन इब्राहीम के धर्म से फिर सकता है, सिवाय उसके जिसने खुद को मूर्ख बनाया हो? निश्चय ही, हमने उसे इस दुनिया में चुना है, और निश्चित ही वह आख़िरत में भी नेक लोगों में से होगा [264]।"
✅ [264] हजरत इब्राहीम का धर्म – सच्ची हिदायत का स्पष्ट सबूत
यह आयत सिखाती है कि असली धर्म वही है जिसे महान पूर्वजों ने अपनाया, खासकर हजरत इब्राहीम (अ.स) ने। उनकी ज़िंदगी दैवीय मार्गदर्शन का एक स्पष्ट और ज़ोरदार सबूत है।
अल्लाह स्वयं इब्राहीम के धर्म को इस्लाम की सच्चाई के सबूत के रूप में प्रस्तुत करता है।
📌 इसलिए, जो भी हजरत इब्राहीम (अ.स) के शुद्ध एकेश्वरवाद और मूल्यों से हटता है, वह केवल खुद को मूर्ख बना रहा है, और सम्मान और नجات दोनों खो रहा है।
✅ नेक संगत का महत्व
यदि हम स्वयं महान न भी हों, तो हमें नेक लोगों की संगत में रहने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि:
जैसे एक ट्रेलर को शक्तिशाली वाहन से जोड़ा जाता है,
या एक धागा मनकों की माला के साथ बिकता है,
वैसे ही नेक लोगों की संगत उन लोगों को ऊंचा उठाती है जो सच्चे दिल से उनके साथ जुड़े रहते हैं।
🕊️ यह हजरत इब्राहीम (अ.स) की विरासत का पालन करने और नेक संगत बनाए रखने की अहमियत को रेखांकित करता है, ताकि हम भी नجات पाने वालों में गिने जाएं।
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सूरह अल-बक़रा आयत 130 तफ़सीर