146. जिन लोगों को हमने किताब दी है, वे उन्हें (नबी मुहम्मद ﷺ) वैसे ही पहचानते हैं जैसे वे अपने अपने बेटे को पहचानते हैं [306]। और निश्चित ही उनमें से एक समूह जान-बूझकर [307] सच्चाई को छुपाता रहा।
📖 सूरह अल-बाक़रा – आयत 146 की व्याख्या
"जिन लोगों को हमने किताब दी है, वे उन्हें (नबी मुहम्मद ﷺ) वैसे ही पहचानते हैं जैसे वे अपने बेटे को पहचानते हैं [306]। और निश्चित ही उनमें से एक समूह जान-बूझकर [307] सच्चाई को छुपाता रहा।"
✅ [306] पैगंबर ﷺ को पहचानना जैसे पिता अपने पुत्र को पहचानता है
यह आयत दर्शाती है कि किताब वाले (विशेष रूप से यहूद) पैगंबर मुहम्मद ﷺ को उतनी ही निश्चितता और स्पष्टता से पहचानते थे जितना एक पिता अपने बेटे को पहचानता है।
🔎 पिता की पहचान के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं:
✅ [307] जान-बूझकर सच्चाई छुपाना विद्वानों के लिए बड़ा गुनाह
यहूद के धार्मिक विद्वानों में दो वर्ग थे:
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सूरह अल-बक़रा आयत 146 तफ़सीर