150. और जहां से भी तुम (हे मुहम्मद) निकलो, अपने मुँह को पवित्र मस्जिद (काबा) की ओर कर लो [314]। और जहाँ भी तुम (ऐ मोमिनों) हो, अपने मुँह को उसकी ओर कर लो, ताकि लोगों के पास तुम्हारे खिलाफ कोई बहाना न रहे [315], सिवाय उन ज़ालिमों के [316]। इसलिए उनका न डरना बल्कि मुझसे ही डरना। ताकि मैं अपनी नेमत तुम्हारे ऊपर पूरी कर सकूँ और तुम सही मार्ग पर चल सको [317]।
📖 सूरह अल-बाक़रा – आयत 150 की व्याख्या
"और जहां से भी तुम (हे मुहम्मद) निकलो, अपने मुँह को पवित्र मस्जिद (काबा) की ओर कर लो। और जहाँ भी तुम (मोमिनों) हो, अपने मुँह को उसकी ओर कर लो, ताकि लोगों के पास तुम्हारे खिलाफ कोई बहाना न रहे, सिवाय उन ज़ालिमों के। इसलिए उनका न डरना बल्कि मुझसे ही डरना। ताकि मैं अपनी नेमत तुम्हारे ऊपर पूरी कर सकूँ और तुम सही मार्ग पर चल सको।"
✅ [314] काबा की तरफ मुख करने का समय, स्थान और सार्वभौमिकता
✅ [315] मूर्तिपूजकों के बहस का अंत
✅ [316] अन्याय करने वालों के उपहास की अनदेखी
✅ [317] अल्लाह की नेमतों की पूरी प्राप्ति
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सूरह अल-बक़रा आयत 150 तफ़सीर