कुरान - 2:156 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

ٱلَّذِينَ إِذَآ أَصَٰبَتۡهُم مُّصِيبَةٞ قَالُوٓاْ إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّآ إِلَيۡهِ رَٰجِعُونَ

अनुवाद -

156. "वो लोग कि जब उन्हें कोई मुसीबत पहुँचती है, तो कहते हैं: 'बेशक, हम अल्लाह के हैं और हम उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं'।

सूरह अल-बक़रा आयत 156 तफ़सीर


सब्र करने वालों का जुमला — इनना लिल्लाह व इन्ना इलैहि राजिऊन

  • इस आयत में उन लोगों का ज़िक्र है जो मुसीबत के वक़्त घबरा नहीं जाते, बल्कि अल्लाह की तरफ़ रजू करते हैं और कहते हैं:
    "इनना लिल्लाहि वा इनना इलैहि राजिऊन"
    (हम अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है)।
  • इस जुमले में दो बड़ी बातें हैं:
    • (1) इकरार (स्वीकार करना) कि हम अल्लाह की मिल्कियत (मालिकियत) हैं — यानी हमारी जान, माल, औलाद — सब उसी का दिया हुआ है।
    • (2) यकीन कि हमें एक दिन उसी की तरफ़ वापस लौटना है — यानी मौत के बाद भी हम उसी के पास जाएंगे।
  • यह जुमला मोमिन के लिए तसल्ली (सांत्वना) और ईमान की मज़बूती बन जाता है — वो किसी भी नुक़सान को अल्लाह की तरफ़ से मानकर सब्र करता है।

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