कुरान - 2:160 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُواْ وَأَصۡلَحُواْ وَبَيَّنُواْ فَأُوْلَـٰٓئِكَ أَتُوبُ عَلَيۡهِمۡ وَأَنَا ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

अनुवाद -

160. "सिवा उन लोगों के जो तौबा करें, अपने आप को ठीक करें, और जो उन्होंने छुपाया था उसे जाहिर कर दें [338]। तो मैं उनकी तौबा कबूल कर लूंगा, और बेशक मैं बड़ा बहुत माफ़ करने वाला, बहुत रहम करने वाला हूँ।"

सूरह अल-बक़रा आयत 160 तफ़सीर


[338] "तौबा, सुधार और छुपाए हुए को जाहिर करना..."

  • यह आयत उन लोगों के लिए उम्मीद की खबर है जिन्होंने पहले आयत 159 में बताए गए गुनाह किए थे।
  • तौबा का मतलब है:
    • दिल से पछतावा करना,
    • अपने बुरे कामों को छोड़ना,
    • और खुद को सही राह पर लाना।
  • सुधार: अपने ग़लत तरीकों और रिवायतों को बदलकर नेक काम करना।
  • जो कुछ छुपाया था उसे जाहिर करना: उस हक़ीक़त को सामने लाना, जो पहले छुपाई गई थी ताकि लोग सही जानकारी से लाभान्वित हो सकें।

👉 अल्लाह तआला यह वादा करते हैं कि जो सच्चे दिल से ऐसा करेंगे, उनकी तौबा को कबूल करेंगे

अल्लाह की माफी और रहमत

  • अल्लाह अपने बंदों के लिए बड़ा माफ़ करने वाला है — जिसका मतलब है कि वह उनके गुनाहों को भुला सकता है।
  • साथ ही वह बहुत रहम करने वाला है, यानी हमेशा उनकी कमजोरी को समझ कर उन्हें मौका देता है।

👉 इससे हम सीखते हैं कि अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है, और तौबा का दरवाजा हमेशा खुला है।

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