162. "वे उस जगह में हमेशा के लिए रहेंगे। न तो उनके लिए सज़ा कम की जाएगी [341], और न ही उन्हें कोई राहत दी जाएगी [342]।"
👉 सबक़: सच्चे ईमान वालों की हालत और काफ़िरों की हालत में बहुत बड़ा फ़र्क़ होता है।
👉 हालांकि, कुछ खास मामलों में अल्लाह की रहमत से अपवाद हो सकते हैं, जैसे हदीस में बताया गया कि अबू लहब को कुछ राहत मिलती है।
निष्कर्ष: यह आयत हमें काफ़िरों की सज़ा की सख्ती का एहसास दिलाती है, और दुनिया में ईमानदारी के साथ रहना और तौबा करते रहना कितना जरूरी है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 162 तफ़सीर