कुरान - 2:165 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَتَّخِذُ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَندَادٗا يُحِبُّونَهُمۡ كَحُبِّ ٱللَّهِۖ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَشَدُّ حُبّٗا لِّلَّهِۗ وَلَوۡ يَرَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ إِذۡ يَرَوۡنَ ٱلۡعَذَابَ أَنَّ ٱلۡقُوَّةَ لِلَّهِ جَمِيعٗا وَأَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعَذَابِ

अनुवाद -

"165. और लोगों में कुछ ऐसे भी हैं जो अल्लाह के सिवा दूसरों को खुदा मान लेते हैं [350]। वे उन्हें उसी तरह प्यार करते हैं जैसे अल्लाह से मोहब्बत की जाती है। और जो ईमान लाते हैं, वे अल्लाह से सबसे ज़्यादा मोहब्बत करते हैं [351]। और जब ज़ालिमों को अल्लाह का सजा अपनी आंखों के सामने दिखेगा, तो वे जान लेंगें कि सारी ताक़त अल्लाह ही के पास है। और निश्चय ही, अल्लाह सख़्त सज़ा देने वाला है।" [

सूरह अल-बक़रा आयत 165 तफ़सीर


[350]

ग़लत खुदाओं की पूजा

  • कुछ लोग इंसानों या चीज़ों को अल्लाह के सिवा खुदा मान लेते हैं।
  • वे उन चीज़ों से वैसी ही मोहब्बत करते हैं जैसी मोहब्बत अल्लाह के लिए होनी चाहिए।
  • ये लोग इन्हें अपने खुदा समझकर उनकी इबादत करते हैं।
  • असली मुमिन ऐसा नहीं करते; वे अपनी मोहब्बत और इबादत सिर्फ़ अल्लाह ही के लिए रखते हैं।

[351]

अल्लाह से असली मोहब्बत

  • मोहब्बत के कई रूप होते हैं, लेकिन सबसे मजबूत मोहब्बत अल्लाह के लिए होती है।
  • यह मोहब्बत मालिक और बंदे के रिश्ते से आती है, जहाँ अल्लाह मालिक हैं और इंसान उसका बंदा।
  • पैग़ंबर ﷺ से मोहब्बत (उनकी नबी होने की वजह से) या माओं-बाप से मोहब्बत (उनकी परवरिश की वजह से) अल्लाह से मोहब्बत के बाद आती है।

सजा का अहसास

  • जब ज़ालिम (गलत करने वाले) अल्लाह की सजा अपनी आंखों के सामने देखेंगे, तो उन्हें समझ आएगा कि सारी ताक़त सिर्फ़ अल्लाह के पास है
  • तब वे अपनी गलती मानेंगे, लेकिन तब तक देर हो चुकी होगी।
  • अल्लाह की सजा बहुत सख़्त है और वह ज़ालिमों को जरूर सजा देगा।

Sign up for Newsletter

×

📱 Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now