कुरान - 2:171 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

وَمَثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ كَمَثَلِ ٱلَّذِي يَنۡعِقُ بِمَا لَا يَسۡمَعُ إِلَّا دُعَآءٗ وَنِدَآءٗۚ صُمُّۢ بُكۡمٌ عُمۡيٞ فَهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ

अनुवाद -

"171. और जो लोग काफ़िर हैं, उनका उदाहरण ऐसे है जैसे कोई ऐसा शख़्स जो किसी ऐसी चीज़ को आवाज़ देता है जो केवल चीख़-पुकार सुनती है, लेकिन कुछ समझती नहीं। वे बहरے, बहरे और अंधे हैं, इसलिए वे नहीं समझते।"

सूरह अल-बक़रा आयत 171 तफ़सीर


काफ़िरों की मिसाल

  • यह आयत उन लोगों की मिसाल देती है जो अल्लाह की हिदायतों पर विश्वास नहीं करते।
  • उनकी हालत वैसी है जैसे कोई व्यक्ति ऐसी चीज़ से बात करता है जो सुन नहीं सकती—जिसका जवाब देना नामुमकिन है।
  • यह दर्शाता है कि उनका रास्ता पकड़ना और सही मार्ग पर चलना बेकार है।

बहरा, बहरा और अंधा होना

  • जैसे बहरे को आवाज़ सुनाई नहीं देती, बहरे से मतलब है कि वे बोल नहीं सकते, और अंधे को कुछ दिखायी नहीं देता, वैसे ही काफ़िरों का दिल और दिमाग़ बंद है।
  • वे हक़ीक़त और अल्लाह की राह को समझने में नाकाम हैं।

समझने की कमी

  • वे अल्लाह का पैग़ाम नहीं समझते क्योंकि उनके दिलों में अंधेरा है।
  • उन्हें सच्चाई जब भी समझाई जाए, वे उसे पहचान नहीं पाते।

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