कुरान - 2:175 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱشۡتَرَوُاْ ٱلضَّلَٰلَةَ بِٱلۡهُدَىٰ وَٱلۡعَذَابَ بِٱلۡمَغۡفِرَةِۚ فَمَآ أَصۡبَرَهُمۡ عَلَى ٱلنَّارِ

अनुवाद -

"175. यही वो लोग हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही खरीदी [374], और बख्शिश के बदले अज़ाब लिया। तो देखो, आग में कैसे सब्र करेंगे!" [374]

सूरह अल-बक़रा आयत 175 तफ़सीर


[374]

हिदायत छोड़कर गुमराही लेना

  • हिदायत (सही राह): इस आयत में जिन लोगों की बात हो रही है, उनके पास हिदायत थी — यानी उन्हें सही रास्ता मालूम था या अल्लाह की तरफ़ से हिदायत मिलने की पूरी क़ाबिलियत थी।
  • क़रार का दिन: कुछ मुफस्सिरीन कहते हैं कि यह हिदायत उस अहद (वादा) की तरफ इशारा है जो इंसानों ने अल्लाह से किया था — कि वे उसकी बंदगी करेंगे।
  • गुमराही खरीदना: इन लोगों ने जानबूझकर हक़ को छोड़कर गुमराही को चुना।
    • यानी सच्चाई को जानते हुए भी उन्होंने अपने नफ़्स (ख़्वाहिश) और दुनिया की लालच को चुना।
  • बख्शिश के बदले अज़ाब लेना: अल्लाह की रहमत और माफ़ी की जगह इन्होंने ऐसा रास्ता चुना जो उन्हें जहन्नम की सज़ा तक पहुंचा देगा।

"तो देखो, आग में कैसे सब्र करेंगे!"

  • यह जुमला तर्ज़े-तंबीह (सख़्त चेतावनी) है — अल्लाह तअला ताज्जुब के लहज़े में कह रहे हैं कि ये लोग जहन्नम की आग में कैसे सब्र करेंगे?
  • हक़ीक़त में, यह कोई तारीफ़ नहीं, बल्कि एक शदीद धमकी है — कि जब उन्होंने अज़ाब को खुद अपने लिए चुना, तो अब भुगतने के लिए तैयार हो जाएं।
  • यह आयत दिखाती है कि गुमराही को जानबूझकर अपनाना, अल्लाह की रहमत को ठुकराना है, और उसका अंजाम बहुत ही भयानक होगा।

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