"175. यही वो लोग हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही खरीदी [374], और बख्शिश के बदले अज़ाब लिया। तो देखो, आग में कैसे सब्र करेंगे!" [374]
सूरह अल-बक़रा आयत 175 तफ़सीर
[374]
हिदायत छोड़कर गुमराही लेना
हिदायत (सही राह): इस आयत में जिन लोगों की बात हो रही है, उनके पास हिदायत थी — यानी उन्हें सही रास्ता मालूम था या अल्लाह की तरफ़ से हिदायत मिलने की पूरी क़ाबिलियत थी।
क़रार का दिन: कुछ मुफस्सिरीन कहते हैं कि यह हिदायत उस अहद (वादा) की तरफ इशारा है जो इंसानों ने अल्लाह से किया था — कि वे उसकी बंदगी करेंगे।
गुमराही खरीदना: इन लोगों ने जानबूझकर हक़ को छोड़कर गुमराही को चुना।
यानी सच्चाई को जानते हुए भी उन्होंने अपने नफ़्स (ख़्वाहिश) और दुनिया की लालच को चुना।
बख्शिश के बदले अज़ाब लेना: अल्लाह की रहमत और माफ़ी की जगह इन्होंने ऐसा रास्ता चुना जो उन्हें जहन्नम की सज़ा तक पहुंचा देगा।
"तो देखो, आग में कैसे सब्र करेंगे!"
यह जुमला तर्ज़े-तंबीह (सख़्त चेतावनी) है — अल्लाह तअला ताज्जुब के लहज़े में कह रहे हैं कि ये लोग जहन्नम की आग में कैसे सब्र करेंगे?
हक़ीक़त में, यह कोई तारीफ़ नहीं, बल्कि एक शदीद धमकी है — कि जब उन्होंने अज़ाब को खुद अपने लिए चुना, तो अब भुगतने के लिए तैयार हो जाएं।
यह आयत दिखाती है कि गुमराही को जानबूझकर अपनाना, अल्लाह की रहमत को ठुकराना है, और उसका अंजाम बहुत ही भयानक होगा।
सूरह अल-बक़रा आयत 175 तफ़सीर