182. फिर अगर कोई डरता है कि वसीयत करने वाले ने वसीयत में कोई अन्याय या गुनाह किया है और फिर दोनों पक्षों के बीच सुलह कराता है, तो उस पर कोई गुनाह नहीं है। वास्तव में, अल्लाह बहुत बख्शने वाला, बड़ा रहम करने वाला है। [397]
न्याय के लिए हस्तक्षेप: अगर किसी को शक हो कि वसीयत करने वाले ने अपनी वसीयत में किसी प्रकार का अन्याय या गुनाह किया है, तो वह व्यक्ति पक्षकारों के बीच सुलह कराकर स्थिति को ठीक कर सकता है। यह सुलह वसीयत में हुए किसी भी अन्याय को दूर करती है और सभी पक्षों के साथ न्याय करती है।
जो कोई इस बीच मध्यस्थता कर किसी विवाद को सुलझाता है, उस पर कोई पाप या गुनाह नहीं होता। उनका मकसद अन्याय को ठीक करना और न्याय कायम करना होता है, इसलिए उनकी यह कोशिश अल्लाह के नज़र में अच्छी मानी जाती है।
अल्लाह को बड़ा बख्शने वाला और बहुत रहम करने वाला बताया गया है। इसका मतलब यह है कि जो लोग न्याय स्थापित करने और अन्याय दूर करने की कोशिश करते हैं, उन्हें अल्लाह की दया और माफी मिलती है, भले ही उनके प्रयासों में कोई गलती हो। अल्लाह न्याय और इंसाफ की कोशिश करने वालों की कदर करता है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 182 तफ़सीर