225. अल्लाह तुमसे उन क़स्मों (सपनों) के बारे में हिसाब नहीं लेता जो अनजाने में की जाती हैं [535]। हाँ, वह तुमसे उन क़स्मों का हिसाब लेता है जो तुम्हारे दिलों की नीयत से की जाती हैं [536]। और यकीनन, अल्लाह सबसे ज़्यादा माफ़ करने वाला, सबसे ज्यादा सहनशील है।
इस आयत से यह स्पष्ट होता है कि अल्लाह उन क़स्मों का हिसाब नहीं लेता, जो अनजाने में की जाती हैं। अगर किसी ने गलती से क़स्म खा ली हो, जैसे कि किसी घटना के बारे में झूठी क़स्म खा लेना, तो इसके लिए कोई ग़लती नहीं मानी जाती। यह क़स्म "क़स्मे लगव" कहलाती है।
अल्लाह उन क़स्मों का हिसाब लेता है जो जानबूझकर और दिल से की जाती हैं। इसका मतलब है कि यदि किसी ने सच मानकर झूठी क़स्म खा ली, तो वह "क़स्मे मुन्क़िदा" कहलाती है। ऐसे में यह क़स्म तो झूठी मानी जाती है और इस पर ग़लती होगी।
तफ़सीर:
यह आयत हमें यह सिखाती है कि अल्लाह ने हमारे दिलों के इरादों को देखा है, और अनजाने में की गई क़स्मों के लिए हमें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। हालांकि, यदि किसी ने जानबूझकर क़स्म खाई और यह झूठी निकली, तो यह एक पाप है और इसके लिए हिसाब लिया जाएगा। इस आयत में अल्लाह की माफ़ी और सहनशीलता का ज़िक्र भी है, जो यह बताता है कि यदि हम सच्चे दिल से तौबा करते हैं, तो अल्लाह हमें माफ़ कर देता है।
सारांश:
इस आयत में यह बताया गया है कि अल्लाह अनजाने में की गई क़स्मों पर कोई हिसाब नहीं लेता, लेकिन जानबूझकर की गई क़स्मों का हिसाब लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि हम सच बोलें और अपनी क़स्मों को बिना किसी गलत इरादे के न लें।
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सूरह अल-बक़रा आयत 225 तफ़सीर