26. अल्लाह इस बात से नहीं शर्माता कि वह कोई मिसाल दे —
चाहे वह मक्खी हो या उस से भी छोटी चीज़ [50]।
जो लोग ईमान रखते हैं, वो जानते हैं कि यह उनके रब की तरफ़ से हक़ है।
लेकिन जो लोग इनकार करते हैं, वो कहते हैं,
"अल्लाह ने ऐसी मिसाल देकर क्या मुराद ली?"
अल्लाह इससे बहुतों को गुमराह करता है,
और बहुतों को हिदायत देता है।
मगर वह गुमराही सिर्फ फासिकों को देता है। [51]
👉 मक्का के काफ़िरों ने कुरआन में दी गई छोटी मिसालों का मज़ाक उड़ाया —
जैसे मक्खी, मच्छर, मधुमक्खी वग़ैरह।
वे कहते थे: “क्या अल्लाह को सिर्फ यही उदाहरण देने को मिला?”
👉 इस आयत में अल्लाह ने जवाब दिया कि:
छोटी चीज़ भी अगर हक़ को ज़ाहिर करे, तो वह भी हिकमत से भरी होती है।
👉 इसी तरह,
👉 इस आयत से ये साबित होता है कि:
👉 इसका मिसाल यूँ समझिए:
👉 इसलिए,
👉 जो लोग फ़ासिक (सीमालंघन करने वाले) हैं,
यानी दिल से हठधर्मी, अहंकारी और नाफरमान हैं,
उन्हीं को कुरआन से गुमराही मिलती है।
नतीजा:
इस आयत में अल्लाह की हिकमत, मिसालों की अहमियत,
और कुरआन की हिदायत या गुमराही बनने की सच्चाई को बयान किया गया है —
और साथ ही ये साफ़ किया गया कि हिदायत पाने के लिए दिल की सच्चाई और रसूल ﷺ से मुहब्बत ज़रूरी है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 26 तफ़सीर