262. "जो लोग अपना माल अल्लाह के रास्ते में खर्च करते हैं, फिर खर्च करने के बाद न तो अहसान जताते हैं और न ही ताना मारते हैं, उनका इनाम उनके रब के पास है। और उन्हें न तो डर होगा और न ही वह शोकित होंगे।" [686] [687] [688]
[686] हर स्थिति और समय में खर्च करना
[687] अहसान जताना और ताना मारने से बचना
[688] ऐसे लोगों के लिए न तो डर और न ही शोक
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्चे सदक़ा देने वाले वे लोग होते हैं जो आत्मिकता और सच्चे इरादे से दान करते हैं। उनके लिए अहसान जताना या ताना मारना कतई उचित नहीं है। और जब वे अपने धन को अल्लाह के रास्ते में खर्च करते हैं, तो उन्हें कियामत के दिन किसी भी प्रकार की चिंता या डर नहीं होगा। उन्हें न ही दुनियावी चिंता सताती है, और न ही आध्यात्मिक दुख। ये गुण सच्चे सालेहीन (अच्छे लोग) के लक्षण होते हैं, जिन्हें कुरआन में अल्लाह के दोस्त (वली) के रूप में वर्णित किया गया है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 262 तफ़सीर