[33] उसने (अल्लाह ने) कहा: "ऐ आदम! इन चीज़ों के नाम उन्हें बता दो" [65]। फिर जब उसने (आदम ने) उन्हें उन सब चीज़ों के नाम बता दिए, तो अल्लाह ने कहा: "क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि मैं आसमानों और ज़मीन की सब छुपी बातें जानता हूं? और मैं जानता हूं जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छिपाते हो?"
इस आयत में यह बात वाज़ेह होती है कि हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को हुक्म दिया गया था कि फ़रिश्तों को नाम "बताओ", न कि "सिखाओ"। "सिखाना" यानी किसी को समझाना और उसकी समझ को विकसित करना, जबकि "बताना" का मतलब केवल जानकारी देना होता है। अल्लाह ने आदम को "सिखाया", लेकिन आदम ने फ़रिश्तों को बस "बताया" — इससे यह साबित होता है कि आदम का इल्म उनसे बेहतर था, और फ़रिश्ते उस स्तर तक नहीं पहुँच सके।
फिर अल्लाह ने फ़रिश्तों को याद दिलाया: “क्या मैंने नहीं कहा था कि मैं आसमान और ज़मीन की सारी छुपी और जाहिर बातें जानता हूं?” — यानी अल्लाह हर उस चीज़ का इल्म रखता है जो मख़लूक़ात के दिलों में छुपी होती है, और जो वे बाहर जाहिर करते हैं।
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सूरह अल-बक़रा आयत 33 तफ़सीर