कुरान - 2:40 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

يَٰبَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ وَأَوۡفُواْ بِعَهۡدِيٓ أُوفِ بِعَهۡدِكُمۡ وَإِيَّـٰيَ فَٱرۡهَبُونِ

अनुवाद -

[40] ऐ बनी इस्राईल! मेरी उस नेमत को याद करो जो मैंने तुम पर की थी, और मेरा अहद पूरा करो, मैं तुम्हारा अहद पूरा करूंगा, और मुझसे ही डरते रहो। [78]

सूरह अल-बक़रा आयत 40 तफ़सीर


🔹 [78] अल्लाह की नेमतों को याद करना और अहद की पासदारी

इस आयत में अल्लाह तआला बनी इस्राईल को उनकी बीती नेमतों की याद दिला रहा है:

  • “मेरी उस नेमत को याद करो” — यानी तुम्हारे ऊपर जो इनआमात (नेकियाँ, रहमतें, फज़ीलतें) की गई थीं, उन्हें याद रखो।
  • यह हुक्म सिर्फ तशक्कुर (शुक्र) के लिए नहीं, बल्कि हिदायत पर चलने और ईमान की ताज़गी के लिए है।

✅ इसी उसूल से उलमा ने एक बड़ी बात निकाली:
अगर अल्लाह ने बनी इस्राईल को अपने पिछले इनआमात याद करने का हुक्म दिया —
तो हमें भी अल्लाह की सबसे बड़ी नेमतहज़रत मुहम्मद ﷺ की पैदाइश (मीलाद) — को याद करना चाहिए।

➡️ यही वजह है कि:

  • मीलादुन्नबी की महफ़िलें (जहाँ नबी की पैदाइश, सीरत और इनआमात का ज़िक्र होता है) —
    जायज़ और मुबारक हैं।
  • ऐसी महफ़िलें शुक्रگزاری, याददिहानी और रहमतों के नुज़ूल का ज़रिया बनती हैं।

🟢 अल्लाह से किया गया वादा — अहद

“मेरा अहद पूरा करो” — इसका मतलब:

  1. अल्लाह की बंदगी करना,
  2. उसकी किताब और रसूलों पर ईमान लाना,
  3. हुक्मों की पैरवी करना।

और बदले में“मैं तुम्हारा अहद पूरा करूंगा”, यानी:

  • तुम्हें हिफाज़त दूंगा,
  • रहमतें बरसाऊंगा,
  • आख़िरत में तुम्हें कामयाबी अता करूंगा।

🛑 “और मुझसे ही डरते रहो” — अल्लाह से डर का सही मतलब

  • सिर्फ अल्लाह से डरना,
  • न कि किसी इंसान, समाज, या ज़ालिम ताकत से,
  • यही तौहीद की अस्ल रूह है।

सबक़:
इस आयत में हमें ये बातें सीखने को मिलती हैं:

  1. अल्लाह की नेमतों को याद करना ईमान को मज़बूत करता है।
  2. नबी ﷺ की पैदाइश का ज़िक्र करना कुरआनी उसूल के मुताबिक़ है।
  3. अल्लाह से किया गया वादा निभाना ही असल कामयाबी की कुंजी है।
  4. डरना है तो सिर्फ अल्लाह से, दुनिया से नहीं।

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