[41] और उस (क़ुरआन) पर ईमान लाओ जो मैंने नाज़िल किया है, जो उस (तौरेत) की तस्दीक़ करता है जो तुम्हारे पास है [79], और तुम सबसे पहले उसके इनकार करने वाले न बनो [80], और मेरी आयतों को थोड़े से दामों में न बेचो [81], और मुझी से डरते रहो।
✅ इससे साफ़ पता चलता है:
यहूदी उलेमा को चेतावनी दी गई कि:
"तुम पहले काफ़िर न बनो", यानी जब तुम्हें सच्चाई सबसे पहले पता चली,
तो तुम ही सबसे पहले उसका इनकार कैसे कर सकते हो?
➡️ क्योंकि जब किसी क़ौम या लीडरशिप क्लास का इनकार होता है,
तो आम लोग भी उनके पीछे चलकर इनकार कर बैठते हैं।
✅ इसलिए उलमा, रहनुमा और बड़ों पर ज़्यादा ज़िम्मेदारी होती है।
➡️ अल्लाह फ़रमाता है: "मेरी आयतों को थोड़े से फायदे के लिए मत बेचो!"
✅ इसका मतलब यह नहीं कि:
❗ बात उन लोगों की है जो हक़ को छुपा कर, या धोखे से,
दुनियावी मक़सद के लिए दीन को बेचते हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
सूरह अल-बक़रा आयत 41 तफ़सीर