[46] जो यक़ीन रखते हैं [87] कि वे अपने रब से मिलने वाले हैं और यह कि वे उसी की ओर लौटाए जाएँगे [88]।
क़ुरआन में “ज़न्न” का मतलब कई बार पक्के यक़ीन से होता है, जैसा कि यहाँ है।
इस आयत में नम्र लोगों की पहचान बताई गई है कि वे आख़िरत, अल्लाह से मुलाक़ात और हिसाब-किताब पर पूरा यक़ीन [87] रखते हैं।
जो लोग नमाज़ में पाबंद होते हैं, वे दरअसल वही लोग हैं जिन्हें आख़िरत में वापसी का यक़ीन [88] होता है।
सिर्फ़ रोज़ा, हज या दूसरे काम नहीं — बल्कि सच्चा ईमान नमाज़ से झलकता है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 46 तफ़सीर