[60] और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी मांगा, तो हमने कहा: "अपनी लाठी से पत्थर पर मारो।" तभी उसमें से बारह [108] सोते फूट निकले। हर गिरोह ने अपना पानी पीने की जगह पहचान ली। अल्लाह की रोज़ी में से खाओ और पियो, और धरती में फसाद फैलाते न फिरो। [109]
यह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का एक बड़ा मोजिज़ा था।
उनकी दुआ पर अल्लाह ने हुक्म दिया कि वे अपनी लाठी से एक पत्थर पर मारें —
और उसी वक्त उसमें से बारह पानी के सोते (चश्मे) फूट निकले,
हर एक सोता बनी इसराईल के बारह क़बीलों में से एक के लिए तय था।
👉 यह मोजिज़ा उस जंगल "तीह" में हुआ था जहाँ बनी इसराईल भटक रहे थे।
आख़िर में अल्लाह ने ताकीद की:
"अल्लाह की रोज़ी से खाओ-पियो, मगर ज़मीन में फसाद मत फैलाओ।"
📌 यानी अगर तुम अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल नहीं करोगे,
गुनाहों और ज़ुल्म में पड़ जाओगे —
तो ये नेमतें भी छिन सकती हैं।
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सूरह अल-बक़रा आयत 60 तफ़सीर