[64] फिर उसके बाद तुम फिर गए। अगर तुम पर अल्लाह का फ़ज़्ल (कृपा) और उसकी रहमत (दया) न होती, तो तुम ज़रूर घाटा उठाने वालों में से हो जाते। [119]
इस आयत में अल्लाह के फ़ज़्ल (बड़ा इनाम) और रहमत (मेहरबानी) का मतलब यह हो सकता है:
🔹 इसलिए साफ़ है कि रसूलुल्लाह ﷺ खुद अल्लाह की रहमत और सबसे बड़ा इनाम हैं।
🔹 उनके आने से ही उम्मत को बचने का रास्ता मिला और अल्लाह की नाराज़गी से पनाह मिली।
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सूरह अल-बक़रा आयत 64 तफ़सीर