[66] और इस तरह हमने इस घटना को उन लोगों के लिए, जो उस वक़्त मौजूद थे और जो उनके बाद आए, एक इबरत (चेतावनी) बना दिया — और अल्लाह से डरने वालों के लिए एक सीख बना दी। [122]
🔹 लेकिन उम्मत-ए-मुहम्मद ﷺ के लिए अल्लाह ने रहमत और नरमी का रास्ता रखा है।
🔹 छोटी ग़लतियों और मासूम बहानों को इस उम्मत के लिए माफ़ कर दिया जाता है।
🔹 इससे अल्लाह की मेहरबानी और इस उम्मत की ख़ुशक़िस्मती ज़ाहिर होती है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 66 तफ़सीर