[95] और वे कभी भी इसकी (मौत की) तमन्ना नहीं करेंगे, कभी नहीं, उन कर्मों के कारण जो उनके हाथों ने पहले भेजे हैं। और अल्लाह ज़ालिमों को भली-भांति जानने वाला है। [182]
यह आयत ग़ैब की एक भविष्यवाणी है, जो क़ियामत तक सच रहेगी। अपने घमंडी दावे के बावजूद कि जन्नत सिर्फ उन्हीं के लिए है, यहूद कभी मौत की तमन्ना नहीं करेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने कितने बुरे कर्म किए हैं।
उनका दुनिया से मोह और मौत से भागना, उनके दावों की सच्चाई खोल देता है।
इसके विपरीत, एक सच्चा मोमिन मौत से नहीं डरता, बल्कि उसे नेकियों की बढ़ोतरी के लिए ज़िन्दगी चाहिए होती है।
इस तरह मौत से डरना अक्सर गुनाहों की ग्लानि को दर्शाता है, और अल्लाह से मिलने की इच्छा सच्चे ईमान की पहचान है।
अल्लाह ही सबसे बेहतर जानता है कि कौन ज़ालिम है — और वह उनके अपने कर्मों के ज़रिये उनकी हकीकत को ज़ाहिर करता है।
अगर अगली आयत तैयार है तो भेजें — मैं बिल्कुल इसी फॉर्मेट में करूँगा:
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
सूरह अल-बक़रा आयत 95 तफ़सीर