कुरान - 5:20 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَةَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذۡ جَعَلَ فِيكُمۡ أَنۢبِيَآءَ وَجَعَلَكُم مُّلُوكٗا وَءَاتَىٰكُم مَّا لَمۡ يُؤۡتِ أَحَدٗا مِّنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ

अनुवाद -

और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की वह नेमत याद करो जो उसने तुम पर की — कि उसने तुम में रसूल बनाए [80], और तुमको बादशाह बनाया [81], और तुमको वह कुछ दिया जो दुनिया वालों में किसी को नहीं दिया [82]।

सूरह अल-मायदा आयत 20 तफ़सीर


📖 सूरा अल-मायिदा – आयत 20 की तफ़्सीर

 

✅ [80] नबियों की नस्ल से होने का दर्जा

इस आयत में हज़रत मूसा عليه السلام की एक तक़रीर का ज़िक्र है, जिसमें उन्होंने बनी इस्राईल को अल्लाह की ख़ास नेमतें याद दिलाईं।

इन नेमतों में से एक यह थी कि कई नबी उन्हीं की नस्ल से उठाए गए। इस तरह वह एक ऐसी क़ौम बनी जिसे अल्लाह ने रसूलों की सूरत में इज़्ज़त बख़्शी।

इससे यह बात साबित होती है कि:
किसी नबी की नस्ल से होना, जब ईमान के साथ हो, तो यह बेहद आला मुक़ाम है।

यही उसूल रसूल ﷺ के अहले बैत पर भी लागू होता है — उनका नसब और उनकी परहेज़गारी उन्हें रूहानी इज़्ज़त बख़्शती है।

बनी इस्राईल को भी यह शराफ़त हासिल थी क्योंकि वो हज़रत इब्राहीम عليه السلام, फिर इसहाक और याक़ूब की संतान थे।

✅ [81] बादशाही और हुकूमत की नेमत

"और तुमको बादशाह बनाया" — इस जुमले से ये बात मालूम होती है कि अल्लाह ने बनी इस्राईल को हुकूमत और इख़्तियार की नेमत भी अता की थी।

इसमें शामिल हैं:

  • हज़रत यूसुफ़ عليه السلام, जो मिस्र में वज़ीर और हाकिम बने।
  • हज़रत दाऊद और सुलेमान عليهما السلام, जो नबी भी थे और बादशाह भी — उनके पास दीनी और दुनियावी दोनों क़ियादत थी।

इससे हमें यह सबक मिलता है:
जब बादशाही नबूवत या परहेज़गारी के साथ मिल जाए, तो यह अल्लाह की तरफ़ से एक बड़ी नेमत और क़ौमी इस्तिक़ाम का ज़रिया बनती है।

अगर इस तरह की इज़्ज़त को अल्लाह की इनायत समझा जाए, तो वह शुक्र और हिदायत का सबब बनती है, ना कि तकब्बुर का।

✅ [82] बनी इस्राईल पर बेमिसाल नेमतें

"और तुमको वह कुछ दिया जो दुनिया वालों में किसी को नहीं दिया" — इससे मुराद हैं वे यूनीक नेमतें, जो सिर्फ़ बनी इस्राईल को मिलीं, जैसे कि:

  • उनमें अक़ाबिर औलिया और नेक लोग बड़ी तादाद में पैदा हुए।
  • मन व सलवा — आसमान से खाना उतारा गया।
  • समुंदर का दो हिस्सों में बंट जाना और फिर फिरऔन से मोजिज़ाना निजात मिलना।
  • फिरऔन और उसकी फ़ौज का हलाक होना, और वो भी उनकी आंखों के सामने

इससे यह सीख मिलती है कि:
अल्लाह की नेमतों को याद करना और दूसरों को याद दिलाना, यह अंभिया की सुन्नत है।

इस तरह की याददिहानी इंसान को शुक्रگزاری की तरफ़ लाती है और अल्लाह की इताअत और तवक्कुल की दावत देती है।

लेकिन जब नाक़द्री और नाफ़रमानी बढ़ी, तो यह नेमतें उनसे छीन ली गईं — और यह हर दौर की क़ौमों के लिए एक चेतावनी है।

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