कुरान - 5:62 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

وَتَرَىٰ كَثِيرٗا مِّنۡهُمۡ يُسَٰرِعُونَ فِي ٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡعُدۡوَٰنِ وَأَكۡلِهِمُ ٱلسُّحۡتَۚ لَبِئۡسَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

अनुवाद -

"और तुम देखोगे कि उनमें से बहुत से लोग गुनाह और ज़्यादती की तरफ़ तेज़ी से बढ़ते हैं [187], और हराम माल खाते हैं। निःसंदेह वे जो कुछ कर रहे हैं वह बहुत बुरा है।"

सूरह अल-मायदा आयत 62 तफ़सीर


📖 सूरा अल-माइदा – आयत 62 की तफ़्सीर

 

✅ [187] उनके गुनाह और सरकशी की हक़ीक़त

इस आयत में यहूदियों में से कुछ लोगों के अख़लाक़ी गिरावट और रूहानी फितरत को बयान किया गया है:

  • गुनाह: इसका मतलब है कि ये लोग तौरात की उन आयतों को छुपाते थे जिनमें रसूलुल्लाह ﷺ की नुबूवत का ज़िक्र था। हक़ को जानबूझकर छुपाना सबसे बड़ा गुनाह है।
  • ज़्यादती (सरकशी): वे तौरात में तहरीफ़ (बदलाव) करते थे, उसमें अपनी मर्ज़ी से इजाफ़ा या कमी कर देते थे, ताकि लोगों को गुमराह कर सकें और दीन को अपनी हवस के मुताबिक़ ढाल सकें।
  • हराम माल खाना: वे लोग रिश्वत लेते थे, नाजायज़ तरीकों से माल कमाते थे और फिर उसे दीन के नाम पर हक़ क़रार देने की कोशिश करते थे।

यह तमाम अमल ज़ुल्म, बदनीयती, और दीन से खिलवाड़ का नमूना हैं — और इसी वजह से अल्लाह ने फ़रमाया कि यह काम बहुत ही बुरा और मज़म्मत के क़ाबिल है।

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