कुरान - 5:77 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

قُلۡ يَـٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لَا تَغۡلُواْ فِي دِينِكُمۡ غَيۡرَ ٱلۡحَقِّ وَلَا تَتَّبِعُوٓاْ أَهۡوَآءَ قَوۡمٖ قَدۡ ضَلُّواْ مِن قَبۡلُ وَأَضَلُّواْ كَثِيرٗا وَضَلُّواْ عَن سَوَآءِ ٱلسَّبِيلِ

अनुवाद -

ऐ किताब वालो! अपने दीन में नाहक़ हद से न बढ़ो [225], और उन लोगों की ख्वाहिशों के पीछे न चलो जो पहले ही गुमराह हो चुके हैं, और कई लोगों को गुमराह कर चुके हैं, और ख़ुद भी सीधी राह से भटक गए हैं [226]।

सूरह अल-मायदा आयत 77 तफ़सीर


📖 सूरा अल-माइदा – आयत 77 की तफ़्सीर

✅ [225] दीन में हद से बढ़ने से मना

इस हुक्म का संबंध किताब वालों से है — उन्हें आगाह किया गया है कि वे अपने अक़ीदे और अमल में हद से आगे न जाएँ

✅ [226] गुमराहों की ख्वाहिशों की पैरवी से बचो

ऐसे लोगों की ख्वाहिशों के पीछे न चलो जिन्होंने न सिर्फ ख़ुद राह खोई, बल्कि दूसरों को भी गुमराह किया, और सीधे रास्ते से भटक गए

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