और जब वे सुनते हैं वह जो नाज़िल किया गया है रसूल पर, तो तुम देखोगे कि उनकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं, इस वजह से कि उन्होंने हक़ को पहचान लिया। वे कहते हैं: "ऐ हमारे रब! हम ईमान लाए, लिहाज़ा हमें (हक़ के) गवाहों में लिख ले।"
✅ [235] हक़ को पहचानकर रो पड़ना
जब नसारा ने क़ुरआन की आयतें सुनीं, और हक़ को पहचान लिया, तो उनकी आँखों से आँसू बहने लगे — यह उनके सच्चे ईमान और इंकिसारी की अलामत थी।
इस आयत से साबित होता है कि अल्लाह की याद में रोना, चाहे मोहब्बत में हो या डर में, एक इबादत है और रूहानी क़ुर्ब का ज़रिया है।
उनका कहना — "हमें गवाहों में लिख ले" — यह दुआ है कि हम भी उन लोगों में हो जाएँ जो हक़ की गवाही देने वाले हैं, और ईमान वालों की सफ़ में शुमार किए जाएँ।
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सूरह अल-मायदा आयत 83 तफ़सीर