लालच, वासना और घमंड का जाल (The Trap of Greed, Lust, and Arrogance)
इस आयत से यह शिक्षा मिलती है कि इंसान अपनी मौत तक लालच, वासना, या घमंड के जाल में फंसा रहता है। कब्र केवल जीवन के एक चरण का प्रतीक है, जबकि अंतिम ठिकाना या तो जन्नत होगा या जहन्नम।
यहाँ "तुमने देखा" (you saw) के प्रयोग से यह संकेत मिलता है कि मौत और आख़िरत का सामना करते हुए इंसान को वास्तविकता का एहसास होता है।
हदीस-ए-मुबारक (The Holy Prophet صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ का कथन):
घमंड और कब्रों की ज़ियारत (Pride and Visiting Graves)
इस आयत में अपने पूर्वजों की कब्रों पर घमंड करने की प्रवृत्ति को भी संबोधित किया गया है। यदि कब्रों की ज़ियारत इस उद्देश्य से की जाती है कि:
लेकिन, यदि कब्रों की ज़ियारत का उद्देश्य यह हो:
धार्मिक संबंधों पर गर्व बनाम दुनियावी घमंड (Pride in Religious Links vs. Worldly Status)
आयत उन लोगों की निंदा करती है जो दुनियावी नेताओं, गाँव के मुखियाओं, या प्रमुखों से अपने परिवारिक संबंधों पर घमंड करते हैं।
लेकिन, धार्मिक और नेक लोगों से जुड़े होने पर गर्व करना जायज़ और सराहनीय है, जैसे कि:
यह अंतर दिखाता है कि धार्मिक भक्ति और नेकियों पर आधारित गर्व सराहनीय है, जबकि दुनियावी प्रतिष्ठा पर आधारित घमंड पाप है।
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Surah Ayat 2 Tafsir