कुरान - 6:143 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

ثَمَٰنِيَةَ أَزۡوَٰجٖۖ مِّنَ ٱلضَّأۡنِ ٱثۡنَيۡنِ وَمِنَ ٱلۡمَعۡزِ ٱثۡنَيۡنِۗ قُلۡ ءَآلذَّكَرَيۡنِ حَرَّمَ أَمِ ٱلۡأُنثَيَيۡنِ أَمَّا ٱشۡتَمَلَتۡ عَلَيۡهِ أَرۡحَامُ ٱلۡأُنثَيَيۡنِۖ نَبِّـُٔونِي بِعِلۡمٍ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ

अनुवाद -

अल्लाह ने पैदा किए आठ जोड़े — दो भेड़ों में से और दो बकरियों में से। कह दो: क्या उसने दोनों नरों को हराम किया है, या दोनों मादाओं को, या जो कुछ दोनों मादाओं के पेट में है [321]? अगर तुम सच्चे हो तो मुझे इल्म के साथ ख़बर दो [322]।

सूरह अल-अनाम आयत 143 तफ़सीर


📖 सूरा अल-अनआम – आयत 143 की तफ़्सीर

✅ [321] बिना आधार के हराम ठहराने की चुनौती

यह आयत भेड़ और बकरी की किस्मों (नर और मादा) का ज़िक्र कर रही है। मुश्रिकों ने बिनाआधार कुछ जानवरों को हराम ठहराया था। अल्लाह उनसे सवाल करता है: क्या तुमने नरों को हराम किया है, या मादाओं को, या उनके पेट में पल रहे बच्चों को? यह सवाल उनके झूठे दावों को बेनक़ाब करता है।

✅ [322] हराम ठहराने के लिए पुख़्ता इल्म ज़रूरी है

अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि इनमें से कोई भी चीज़ हराम नहीं की गई। मुश्रिकों ने अपने मन से पाबंदियाँ बना ली थीं। अल्लाह का हुक्म है: "अगर तुम सच्चे हो तो इल्म और दलील लेकर आओ।" यानी, गुमान और रिवायत हराम ठहराने का आधार नहीं हो सकती।

✅ [323] हराम ठहराने का हक़ सिर्फ़ अल्लाह को है

कोई चीज़ तभी हराम होगी जब उसके लिए क़ुरआन या सुन्नत से साफ़ दलील मौजूद हो। वरना उसका असल हुक्म हलाल ही रहेगा। इसलिए जो लोग किसी चीज़ को हराम ठहराते हैं, उन पर दलील लाना लाज़िमी है, जबकि हलाल मानने वालों को दलील की ज़रूरत नहीं, क्योंकि असल हुक्म ही जायज़ है।

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