يَوۡمَئِذٖ تُحَدِّثُ أَخۡبَارَهَا

Surah Ayat 4 Tafsir


क़यामत के दिन धरती की गवाही (The Earth's Testimony on the Day of Judgement)

धरती अपनी खबर बयान करेगी (The Earth Narrating Its News)

  • उस दिन धरती अपनी सारी खबर बयान करेगी (कुरआन, 99:4)।
  • इसका मतलब यह है कि धरती का हर कोना उन अच्छे और बुरे कामों की गवाही देगा, जो लोगों ने उस पर किए होंगे।
  • धरती हर छोटे-बड़े, छिपे और खुले अमल की गवाह बनेगी।

अच्छे आमाल को ऊंची आवाज़ में करना (The Command to Perform Good Deeds Audibly)

  • इसीलिए कुछ इबादतों, जैसे अज़ान (नमाज़ की पुकार) और ज़िक्र (अल्लाह की याद) को ऊंची आवाज़ में करने का हुक्म दिया गया है।
  • इसका मकसद यह है कि धरती के दूर-दराज़ के हिस्से भी आपकी नेकियों की गवाही दें।
  • जितना ज्यादा दिल से और बुलंद आवाज़ में किया जाएगा, उतनी ही बड़ी गवाही क़यामत के दिन मिलेगी।

साइंस के अजूबे और धरती की गवाही (Scientific Wonders and the Earth's Testimony)

  • आज साइंस की तरक्की से सैटेलाइट, रेडियो और टेलीफोन जैसी तकनीकों के ज़रिए आवाज़ और तस्वीरें दूर-दूर तक भेजी जा सकती हैं।
  • अगर यह सब दुनिया में मुमकिन है, तो क़यामत के दिन धरती का बोलना भी नामुमकिन नहीं।
  • यह अल्लाह की कुदरत और आखिरत की हकीकत की याद दिलाता है।

क़यामत के दिन सात गवाह (The Seven Types of Witnesses on the Day of Judgement)

क़यामत के दिन सात तरह के गवाह होंगे, जो इंसान के आमाल (कामों) की गवाही देंगे:

  • धरती: उस पर किए गए हर अमल की गवाही देगी।
  • आसमान: इसके नीचे जो कुछ हुआ, उसकी गवाही देगा।
  • वक़्त: खास लम्हे गवाही देंगे कि उन्हें कैसे गुज़ारा गया।
  • इंसान के अंग: हर हिस्सा बयान करेगा कि उसे किस काम में लगाया गया।
  • अमल लिखने वाले फ़रिश्ते: जो रिकॉर्ड रखते हैं, वे अपनी गवाही देंगे।
  • अमलनामा: वह किताब जिसमें हर छोटा-बड़ा अमल लिखा हुआ होगा।
  • अल्लाह तआला: जो हर छुपी और जाहिर चीज़ का सबसे बड़ा गवाह है।

तफ़सीर रूहुल बयान में इसका ज़िक्र किया गया है, जिससे पता चलता है कि क़यामत के दिन इंसान को पूरी तरह से हिसाब देना होगा।

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