إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ فَلَهُمۡ أَجۡرٌ غَيۡرُ مَمۡنُونٖ

Surah Ayat 6 Tafsir


आयत: "सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और अच्छे काम किए, उनके लिए है अनंत इनाम" (Except Those Who Believe and Do Righteous Deeds, for Them There Is Endless Reward)

7: ईमान का अच्छे कर्मों से पहले आना (Faith Precedes Good Deeds)

ईमान पहले आता है: यह आयत इस बात को स्पष्ट करती है कि अच्छे कर्मों से पहले ईमान होना चाहिए। बिना ईमान के कोई अच्छा काम मान्य या स्वीकार्य नहीं होता। ईमान एक बुनियाद है, जिस पर अच्छे कर्मों का निर्माण होता है। यह इस बात पर जोर देती है कि अल्लाह और उसकी हिदायत पर सच्चे दिल से विश्वास करना आवश्यक है, इससे पहले कि हम अच्छे कर्म करें।

अच्छे कर्मों में निरंतरता (Consistency in Good Deeds): मोमिनों को यह प्रेरित किया जाता है कि वे अच्छे कर्मों को निरंतर करते रहें, न कि केवल एक बार। अच्छे कर्मों को जीवन का एक स्थायी हिस्सा बनाना चाहिए। एक मोमिन को यह महसूस नहीं करना चाहिए कि एक अच्छा काम करने के बाद वह अपने कर्तव्यों से मुक्त हो गया। बल्कि, उसे हर समय नेक कार्य करने की कोशिश करनी चाहिए।

किसी भी अच्छे कर्म को तुच्छ न समझना (No Good Deed Should Be Considered Trivial): हर अच्छाई की क्रिया का मूल्य है। मोमिनों को किसी भी अच्छे काम को तुच्छ नहीं समझना चाहिए, चाहे वह छोटा सा क्यों न हो। अल्लाह ने ईमान को अच्छे कर्मों से पहले रखा है और "किया" के लिए Past Continuous Tense का प्रयोग किया है, जिससे यह पता चलता है कि अच्छे कामों को जीवन का एक निरंतर हिस्सा होना चाहिए।

परिवार और दूसरों के लिए लाभ (Benefits for Family and Others): इस आयत से यह भी साबित होता है कि मोमिनों के छोटे बच्चे उनके अच्छे कर्मों और परहेज़गारी से लाभान्वित होते हैं। इसी तरह, गुनाहगार भी नेक लोगों की शफ़ा'त से माफ़ी पा सकते हैं। यह अच्छे कामों के आपसी जुड़ाव और उनके दूसरों पर प्रभाव को दर्शाता है।

एसा-ए-सवाब (मृतकों को कर्मों का इनाम भेजना) (Esal-e-Sawab – Conveying Rewards to the Departed Souls): यह आयत एसा-ए-सवाब की प्रथा का विरोध नहीं करती है, जिसमें अच्छे कर्मों का इनाम मृतकों तक पहुँचाया जाता है। किसी व्यक्ति के अच्छे काम दूसरों तक पहुँचाए जा सकते हैं और उस व्यक्ति के लिए इनाम वैध माना जाता है, जिसे यह भेजा जाता है।

8: अनंत और हमेंशा इनाम (Endless and Eternal Reward)

पवित्र व्यक्तियों के लिए इनाम अनंत है (The Endless Reward for the Pious): इसका मतलब यह है कि जैसे-जैसे वे बूढ़े होते हैं, बीमार पड़ते हैं, या यात्रा करते हैं, उनके द्वारा किए गए अच्छे कर्मों का इनाम निरंतर बना रहता है, जैसे उनके युवावस्था या अच्छे स्वास्थ्य के समय होता था। उनके कर्म और उनके इनाम समय से सीमित नहीं होते।

मृत्यु के बाद का इनाम (Post-Death Rewards): एक मोमिन की मृत्यु के बाद, उनके नियुक्त फरिश्ते उनके कर्मों को लिखते रहते हैं, और उनका इनाम जारी रहता है क्योंकि फरिश्ते उनके क़ब्र पर इबादत करते हैं। उनके अच्छे कर्मों का इनाम तब तक मिलता रहता है जब तक क़ियामत का दिन नहीं आता। यह अच्छे कर्मों के इनाम की स्थायिता को दर्शाता है, जो जीवन के बाद भी चलता है।

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