पवित्र पैग़ंबर ﷺ अविश्वासियों को सूचित कर रहे हैं कि वह अल्लाह, जिसकी वह इबादत करते हैं, कभी भी उनकी पूजा नहीं की जाएगी। इसके बजाय, वे कुफ्र (infidelity) और उन्नति (transgression) की स्थिति में मरेंगे। यह बयान अल्लाह के ज्ञान के बारे में एक गहरी सच्चाई को उजागर करता है, जो व्यक्तियों के अंतिम भाग्य के बारे में है।
मुख्य शिक्षा (Key Lesson):
ईश्वर का ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति के अंत के बारे में (Divine Knowledge of the End of Every Person):
अल्लाह तआला ने अपने प्यारे पैग़ंबर ﷺ को हर व्यक्ति के अंतिम परिणाम के बारे में पूर्ण ज्ञान दिया है, जिसमें यह भी शामिल है कि वे कुफ्र (infidelity) की अवस्था में मरेंगे या इमान (faith) की अवस्था में। यह दिव्य बुद्धिमत्ता (Divine wisdom) और पूर्वज्ञान (foresight) को दर्शाता है, जो हर आत्मा (soul) के भाग्य के बारे में है। इस संदर्भ में, यह संबोधन विशेष रूप से उन अविश्वासियों की ओर है जो अविश्वासी (non-believers) के रूप में मरने के लिए नियत (destined) थे, उनके भाग्य (fate) की निश्चितता (certainty) को रेखांकित करता है।
यह हमें यह सिखाता है कि अल्लाह का ज्ञान सब चीज़ों को शामिल करता है, जिसमें हर व्यक्ति का अंतिम अंत (end) भी शामिल है, और कुछ व्यक्ति अपने प्रयासों के बावजूद अविश्वास (infidelity) में ही रहेंगे, भले ही पवित्र पैग़ंबर ﷺ उन्हें मार्गदर्शन देने के लिए प्रयास करें।
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Surah Ayat 5 Tafsir