कुरान - 1:4 सूरह अल-फ़ातिहा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

مَٰلِكِ يَوۡمِ ٱلدِّينِ

अनुवाद -

बदले के दिन का मालिक।

सूरह अल-फ़ातिहा आयत 4 तफ़सीर


📖 सूरह अल-फ़ातिहा – आयत 4 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

 

✅ “बदले के दिन का मालिक” का अर्थ

इस आयत में “बदले का दिन” से तात्पर्य है “यौम-अद-दीन” — यानी क़यामत का दिन, जब हर आत्मा को उसके कर्मों का हिसाब देना होगा। यह वह दिन होगा जब कोई अमल छुपाया नहीं जा सकेगा, और हर अच्छा-बुरा काम अपने नतीजे तक पहुँचेगा। जैसे जौ बोकर गेहूं नहीं उगता, वैसे ही हर कर्म का स्वाभाविक परिणाम होता है — यही इंसाफ़, ईमान की बुनियाद है।

✅ क़यामत के दिन की आवश्यकता

दुनिया में कभी-कभी भले और बुरे कर्मों का परिणाम दिखता है, लेकिन अक्सर यह भी होता है कि

  • गुनहगार और ज़ालिम चैन से जीते हैं,
  • जबकि नेक और सच्चे लोग तकलीफ़ें सहते हैं
    ऐसे असंतुलन को दूर करने के लिए, अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का तक़ाज़ा है कि एक ऐसा दिन हो जहाँ
  • हर इंसान का पूरा-पूरा हिसाब लिया जाए,
  • और किसी के साथ ज़रा भी नाइंसाफ़ी न हो — यही दिन है क़यामत का दिन
  •  

✅ मालिकियत केवल अल्लाह के लिए

इस दुनिया में इंसानों को सीमित हुकूमत और इख़्तियार मिलता है, लेकिन उस दिन,

  • सारी बादशाहत, फ़ैसले और अधिकार सिर्फ़ अल्लाह के होंगे
    वह अकेला ही
  • हुकूमत करेगा,
  • फैसला सुनाएगा,
  • और हर अमल का बदला देगा,
    बिना किसी गलती या पक्षपात के — यही है उसकी पूर्ण मालिकियत और न्याय का प्रदर्शन

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