बदले के दिन का मालिक।
इस आयत में “बदले का दिन” से तात्पर्य है “यौम-अद-दीन” — यानी क़यामत का दिन, जब हर आत्मा को उसके कर्मों का हिसाब देना होगा। यह वह दिन होगा जब कोई अमल छुपाया नहीं जा सकेगा, और हर अच्छा-बुरा काम अपने नतीजे तक पहुँचेगा। जैसे जौ बोकर गेहूं नहीं उगता, वैसे ही हर कर्म का स्वाभाविक परिणाम होता है — यही इंसाफ़, ईमान की बुनियाद है।
दुनिया में कभी-कभी भले और बुरे कर्मों का परिणाम दिखता है, लेकिन अक्सर यह भी होता है कि
इस दुनिया में इंसानों को सीमित हुकूमत और इख़्तियार मिलता है, लेकिन उस दिन,
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सूरह अल-फ़ातिहा आयत 4 तफ़सीर