"तुम्हारा दोस्त तो बस अल्लाह है [174], और उसका रसूल, और वे मोमिन जो नमाज़ क़ायम रखते हैं, ज़कात अदा करते हैं और अल्लाह के आगे झुकते हैं [175]।"
"वली" का अर्थ यहां है — सच्चा मददगार, हामी और सरपरस्त, न कि ख़लीफ़ा या सियासी रहनुमा।
इसकी तफ़्सीर में कुछ अहम बातें:
यह आयत हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम (रज़ि.अ) के बारे में नाज़िल हुई, जो यहूदी आलिम थे और बाद में इस्लाम कबूल कर लिया।
जब उन्होंने देखा कि यहूदी क़ौम उनसे कट्टी कर रही है, तो उन्हें तन्हाई और तर्ज़-बह-तर्ज़ महसूस होने लगा। इस पर यह आयत नाज़िल हुई कि:
यह आयत इस्लामी भाईचारे और अख़ूव्वत (भाईचारे) की अहमियत को उजागर करती है — कि एक मोमिन को बाहरी तज़्लीलों या समाज की बेरुख़ी से मायूस नहीं होना चाहिए, क्यूंकि अल्लाह और उसका जमाअत ही उसका असली सहारा है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
सूरह अल-मायदा आयत 55 तफ़सीर