कुरान - 5:94 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَيَبۡلُوَنَّكُمُ ٱللَّهُ بِشَيۡءٖ مِّنَ ٱلصَّيۡدِ تَنَالُهُۥٓ أَيۡدِيكُمۡ وَرِمَاحُكُمۡ لِيَعۡلَمَ ٱللَّهُ مَن يَخَافُهُۥ بِٱلۡغَيۡبِۚ فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ

अनुवाद -

ऐ ईमान वालों! अल्लाह तुम्हें ज़रूर आज़माएगा ऐसे शिकार से, जिस तक तुम्हारे हाथ और भाले पहुँच सकते हैं — ताकि अल्लाह यह प्रकट कर दे कि कौन उस से बग़ैर देखे डरता है [258]। फिर इसके बाद जो कोई हद से बढ़ेगा, उसके लिए है दर्दनाक सज़ा [259]।

सूरह अल-मायदा आयत 94 तफ़सीर


📖 सूरा अल-माइदा – आयत 94 की तफ़्सीर

✅ [258] हुदैबिया के मौके पर आज़माइश का इम्तिहान

यह आयत हिजरी छठे साल की उस घटना की ओर इशारा करती है जब मुसलमान हुदैबिया की संधि के वक्त एहराम में थे और शिकार हराम था। अल्लाह ने उन्हें आज़माने के लिए पक्षियों और जानवरों को उनके हाथों और भालों की पहुँच में भेजा। उन्हें शिकार करना आसान था, लेकिन हर सहाबी ने ज़बरदस्त सब्र और तक़वा के साथ शिकार से परहेज़ किया और इस इम्तिहान में कामयाबी पाई।

✅ [259] चेतावनी देकर आज़माना — एक बड़ी नेमत

इस आज़माइश में दो बड़ी नेमतें अता की गईं:

  1. मुसलमानों को पहले से ही ख़बरदार कर दिया गया, ताकि वे रूहानी तौर पर तैयार रहें।
  2. अल्लाह ने उनके दिलों को मज़बूती दी, जैसा कि तालूत के साथियों में से बहुत से लोग नदी के इम्तिहान में नाकाम हो गए थे।

इसी तरह, नबी ﷺ ने भी अपनी उम्मत को क़ब्र के सवालों और जवाबों से पहले ही आगाह कर दिया, जो अल्लाह की ख़ास रहमत है — क्योंकि इम्तिहान आमतौर पर छुपे होते हैं, लेकिन इस उम्मत को पहले से हिदायत देकर सम्मानित किया गया

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