फिर वे अल्लाह की ओर क्यों नहीं पलटते और उससे क्षमा क्यों नहीं माँगते? [221] और अल्लाह बहुत क्षमाशील, अत्यंत दयालु है।
इस आयत में रुजू (तौबा) का अर्थ है शिर्क और ग़लत अकीदों को छोड़कर अल्लाह की वहदानियत (तौहीद) को अपनाना। मग़फ़िरत तलब करने का मतलब है पिछले गुनाहों और ग़लत अकीदों पर सच्चे दिल से पछताना। इस तौबा के कई पहलू हैं:
इसलिए यह आयत दोहराव नहीं, बल्कि तौबा की अहमियत और अल्लाह की माफ़ी और रहमत के वादे को उजागर करती है जो सच्चे दिल से तौबा करने वालों के लिए है।
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सूरह अल-मायदा आयत 74 तफ़सीर