"कह दो: ऐ एहले-किताब! तुम किसी (दीन) पर नहीं हो जब तक कि तुम तौरात और इंजील और जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर नाज़िल हुआ है, उसे क़ायम न करो [204]। और जो तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम्हारी तरफ़ नाज़िल हुआ है, वह उनमें से बहुतों को ज़रूर बग़ावत और कुफ़्र में और बढ़ा देगा [206]। लिहाज़ा तुम काफ़िर लोगों पर ग़म न करो [207]।"
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सूरह अल-मायदा आयत 68 तफ़सीर