कुरान - 9:2 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

فَسِيحُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ أَرۡبَعَةَ أَشۡهُرٖ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّكُمۡ غَيۡرُ مُعۡجِزِي ٱللَّهِ وَأَنَّ ٱللَّهَ مُخۡزِي ٱلۡكَٰفِرِينَ,

अनुवाद -

तो (ऐ मुशरिको!) ज़मीन में चार महीने तक चैन से घूम फिर लो, और जान लो कि तुम अल्लाह को हरा नहीं सकते, और अल्लाह काफ़िरों को ज़लील करेगा [2]।

सूरह अत-तौबा आयत 2 तफ़सीर


📖 सूरा अत-तौबा – आयत 2 की तफ़्सीर

✅ [2] चार महीने की मोहलत और उसका सन्दर्भ

इस आयत में उन मुशरिकों को चार महीने की मोहलत दी गई जो मुसलमानों से किया हुआ अहद तोड़ चुके थे। इस दौरान वे अरब की सरज़मीं पर बिना किसी ख़ौफ़ के घूम फिर सकते थे।

  • यह मोहलत सिर्फ़ उन्हीं के लिए थी जिन्होंने अहद तोड़ा था, जबकि कुछ क़बीलों (जैसे बनू हमज़ा और बनू किनाना) ने वफ़ादारी निभाई, उन्हें छूट मिली।
  • चार महीने के बाद उनके सामने सिर्फ़ दो रास्ते बचे:
    • इस्लाम क़बूल करना, या
    • जंग के लिए तैयार होना

यह एलान हिजरत के नौवें साल किया गया, यानी फ़त्ह-ए-मक्का के एक साल बाद। उस साल के हज में यह ऐलान खुलेआम किया गया।

  • हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ि.) और हज़रत अली (रज़ि.) को मक्का भेजा गया ताकि वे यह एलान सब तक पहुँचा दें।
  • इस एलान में यह भी कहा गया कि:
    • मुशरिक अब कभी हज और तवाफ़ नहीं कर सकेंगे।
    • मोहलत के बाद उनसे जिज़्या भी क़बूल नहीं किया जाएगा।
    • सिर्फ़ दो विकल्प होंगे: इस्लाम या फिर जंग

आयत के आख़िर में अल्लाह ने फ़रमाया कि कोई उसकी क़ुदरत से बाहर नहीं निकल सकता और आख़िरकार वह काफ़िरों को ज़लील करेगा।

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