कुरान - 9:3 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

وَأَذَٰنٞ مِّنَ ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦٓ إِلَى ٱلنَّاسِ يَوۡمَ ٱلۡحَجِّ ٱلۡأَكۡبَرِ أَنَّ ٱللَّهَ بَرِيٓءٞ مِّنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ وَرَسُولُهُۥۚ فَإِن تُبۡتُمۡ فَهُوَ خَيۡرٞ لَّكُمۡۖ وَإِن تَوَلَّيۡتُمۡ فَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّكُمۡ غَيۡرُ مُعۡجِزِي ٱللَّهِۗ وَبَشِّرِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ,

अनुवाद -

और अल्लाह और उसके रसूल की तरफ़ से लोगों के लिए हज-ए-अकबर के दिन साफ़ ऐलान है कि अल्लाह मुशरिकों से पाक है और उसका रसूल भी। तो अगर तुम तौबा कर लो तो तुम्हारे ही लिए बेहतर है, और अगर मुँह मोड़ लो तो जान लो कि तुम अल्लाह को हराने वाले नहीं हो, और (ऐ रसूल!) काफ़िरों को दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी सुना दो [3]।

सूरह अत-तौबा आयत 3 तफ़सीर


📖 सूरा अत-तौबा – आयत 3 की तफ़्सीर

✅ [3] हज-ए-अकबर के दिन का एलान और उसकी अहमियत

इस आयत में उस खुले एलान का ज़िक्र है जो हज़रत अली (रज़ि.) ने हज-ए-अकबर के मौके पर रसूलुल्लाह ﷺ की तरफ़ से किया। इसमें साफ़ कर दिया गया कि अल्लाह और उसका रसूल ﷺ उन तमाम मुशरिकों से बरी हैं जिन्होंने अपने अहद तोड़े

  • हज-ए-अकबर से मुराद ज़्यादातर मुफस्सिरीन के नज़दीक यौम-ए-नहर (10 ज़िलहिज्जा) है।
  • कुछ उलमा के नज़दीक जब हज का दिन जुमे के दिन आ जाए तो वह हज-ए-अकबर कहलाता है।
  • रसूलुल्लाह ﷺ का हज-ए-विदा भी जुमे के दिन हुआ था।

✅ [4] तौबा का फ़ायदा ख़ुद गुनहगार को है

आयत में मुशरिकों से कहा गया कि अगर तुम तौबा कर लो तो तुम्हारे लिए बेहतर है। यानी इस्लाम क़बूल करने से फ़ायदा सिर्फ़ तुम्हें ही होगा, नबी ﷺ या अल्लाह की शान में कोई कमी नहीं आएगी।

✅ [5] अरब के मुशरिकों के लिए ख़ास चेतावनी

यह एलान ख़ास तौर पर अरब के मुशरिकों के लिए था जिन्होंने अहद तोड़े।

  • अगर वे इस्लाम क़बूल कर लें तो उनके लिए भलाई है।
  • अगर इंकार करें तो उन्हें सिर्फ़ दो ही रास्ते होंगे: इस्लाम या फिर तलवार
  • अरब के बाहर के काफ़िरों से जिज़्या क़बूल किया जा सकता था, मगर अरब के मुशरिकों को इसकी इजाज़त नहीं थी।

✅ [6] अज़ाब दुनिया और आख़िरत दोनों में

इस आयत में मुशरिकों को दोहरी चेतावनी दी गई:

  • दुनिया में उन्हें शिकस्त, मौत और ज़िल्लत का सामना करना होगा।
  • आख़िरत में उनका ठिकाना जहन्नम की आग होगी।

मुमिनों के लिए यह आयत सुकून और तसल्ली है कि अल्लाह उनकी हिफ़ाज़त करता है और जो मुश्किलें उन पर आती हैं वह इम्तेहान हैं, अज़ाब नहीं

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