यही वे लोग हैं जिनपर अल्लाह ने लानत की है, और जिसपर अल्लाह लानत कर दे, तू उसके लिए कोई मददगार कभी न पाएगा [187]।
यह आयत बताती है कि जिसे अल्लाह ने लानत की, उसके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में कोई मददगार नहीं होता।
इससे यह मालूम हुआ कि:
लेकिन जो लोग लानत के पात्र बनते हैं और कुफ़्र में डूबे होते हैं, उनके लिए कभी कोई मदद नहीं होती।
उन पर अल्लाह की रहमत से पूरी तरह से पर्दा डाल दिया जाता है।
इसलिए अगर कोई कहे: मेरा कोई मददगार नहीं, तो यह कथन कभी-कभी अंदरूनी तौर पर कुफ़्र की तरफ़ इशारा कर सकता है — जानबूझकर या अनजाने में।
क्योंकि सच्चा मोमिन कभी अकेला नहीं होता, उसके साथ अल्लाह की मदद हमेशा रहती है।
जैसा कि अल्लाह फ़रमाता है:
"निश्चय ही अल्लाह और उसका रसूल ही तुम्हारे दोस्त हैं।" (सूरा अल-मायिदा, 5:55)
और:
"नेकियों और परहेज़गारी में एक-दूसरे की मदद करो।" (सूरा अल-मायिदा, 5:2)
ये आयतें साबित करती हैं कि मोमिन कभी बेसहारा नहीं होता, जबकि लानतज़दा काफ़िर पूरी तरह से बेयारो मददगार छोड़ दिया जाता है।
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सूरह अन-निसा आयत 52 तफ़सीर