कुरान - 2:138 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

صِبۡغَةَ ٱللَّهِ وَمَنۡ أَحۡسَنُ مِنَ ٱللَّهِ صِبۡغَةٗۖ وَنَحۡنُ لَهُۥ عَٰبِدُونَ

अनुवाद -

"हमने अल्लाह का रंग अपनाया [278], और अल्लाह के रंग से बेहतर रंग किसका हो सकता है? और हम उसी की इबादत करते हैं।"

सूरह अल-बक़रा आयत 138 तफ़सीर


[278] "हमने अल्लाह का रंग अपनाया..."

  • यह आयत एक तशबीह (metaphor) के ज़रिये मुसलमानों की रूहानी (spiritual) पहचान को बयान करती है।
  • "अल्लाह का रंग" से मुराद है — वो दीन, वो अख़्लाक़, वो तौहीद, जो अल्लाह ने हमें अता किया है।
  • ईसाई लोग अपने बच्चों को बपतिस्मा (baptism) देते हैं — एक पानी से गुस्ल जो उनके मज़हब में दाख़िल होने की रस्म मानी जाती है।
  • हिंदू लोग होली पर रंग लगाते हैं — ये भी एक धार्मिक प्रतीक (symbol) माना जाता है।

📌 इस्लाम का रंग कोई बाहरी रंग नहीं — बल्कि दिलों में उतर जाने वाला, अंदर से बदल देने वाला, और पूरा किरदार व ज़िंदगी संवार देने वाला होता है।

🌟 "और अल्लाह के रंग से बेहतर रंग किसका हो सकता है?"

  • यहाँ सवाल नहीं बल्कि एलान है — कि अल्लाह का रंग, यानी उसका दीन और उसकी दी गई हिदायत, सबसे बेहतरीन है
  • कोई इंसानी रस्म, कोई बनावटी प्रतीक, अल्लाह की दी हुई ईमान और तौहीद की रोशनी से बेहतर नहीं हो सकता।

💡 मुसलमानों की असली पहचान यही "अल्लाह का रंग" है — जो उनके दिल, सोच, और अमल में दिखाई देता है।

"और हम उसी की इबादत करते हैं।"

  • इस हिस्से में मुसलमानों का अकीदा और मक़सद-ए-हयात (purpose of life) बयान किया गया है:
    कि हम सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करते हैं —
    ना किसी और की पूजा, ना किसी और को हिस्सा बनाना।

📌 ये लाइन तौहीद का एलान है — कि हम एक अल्लाह को मानते हैं, उसी की बन्दगी करते हैं, और वही हमारा मालिक है।

🌟 इस आयत से मिलने वाले अहम सबक़:

1. अल्लाह का रंग यानी इस्लाम:
हमारी पहचान हमारा रंग, ईमान, तौहीद और पाकीज़ा किरदार है — यही असली इस्लामी रंग है।

2. बाहरी रस्में नहीं, अंदरूनी तब्दीलियाँ ज़रूरी हैं:
दीन का रंग दिल पर चढ़ता है, अंदर से इंसान को बदलता है — सिर्फ़ कोई बाहरी रस्म काफी नहीं।

3. अल्लाह की दी हुई हिदायत सबसे बेहतरीन है:
इंसानों की बनाई हुई चीज़ें अल्लाह के दीन का मुक़ाबला नहीं कर सकतीं।

4. तौहीद और इबादत का एलान:
असली मुसलमान वो है जो सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करता है — बिना किसी साझीदार के।

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