"हमने अल्लाह का रंग अपनाया [278], और अल्लाह के रंग से बेहतर रंग किसका हो सकता है? और हम उसी की इबादत करते हैं।"
📌 इस्लाम का रंग कोई बाहरी रंग नहीं — बल्कि दिलों में उतर जाने वाला, अंदर से बदल देने वाला, और पूरा किरदार व ज़िंदगी संवार देने वाला होता है।
💡 मुसलमानों की असली पहचान यही "अल्लाह का रंग" है — जो उनके दिल, सोच, और अमल में दिखाई देता है।
📌 ये लाइन तौहीद का एलान है — कि हम एक अल्लाह को मानते हैं, उसी की बन्दगी करते हैं, और वही हमारा मालिक है।
1. अल्लाह का रंग यानी इस्लाम:
हमारी पहचान हमारा रंग, ईमान, तौहीद और पाकीज़ा किरदार है — यही असली इस्लामी रंग है।
2. बाहरी रस्में नहीं, अंदरूनी तब्दीलियाँ ज़रूरी हैं:
दीन का रंग दिल पर चढ़ता है, अंदर से इंसान को बदलता है — सिर्फ़ कोई बाहरी रस्म काफी नहीं।
3. अल्लाह की दी हुई हिदायत सबसे बेहतरीन है:
इंसानों की बनाई हुई चीज़ें अल्लाह के दीन का मुक़ाबला नहीं कर सकतीं।
4. तौहीद और इबादत का एलान:
असली मुसलमान वो है जो सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करता है — बिना किसी साझीदार के।
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सूरह अल-बक़रा आयत 138 तफ़सीर