कुरान - 2:147 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُمۡتَرِينَ

अनुवाद -

147. (हे सुनने वाले) यह तुम्हारे रब से सच्चाई [308] है। इसलिए सतर्क रहो! कभी उन लोगों में से मत बनो जो शक में रहते हैं।

सूरह अल-बक़रा आयत 147 तफ़सीर


📖 सूरह अल-बाक़रा – आयत 147 की व्याख्या
"(हे सुनने वाले) यह तुम्हारे रब से सच्चाई [308] है। इसलिए सतर्क रहो! कभी उन लोगों में से मत बनो जो शक में रहते हैं।"

✅ [308] “सच्चाई” – इसका तात्पर्य कुरान, सुन्नत और पैगंबर ﷺ से है

  • "अल-हक़" (सच्चाई) इस आयत में इस्लाम के कई मूलभूत पहलुओं की ओर संकेत करता है:
    • पाक कुरान — अल्लाह का वचन और अंतिम सत्य का पैमाना
    • पैगंबर ﷺ के अहादीस — उनके कथन और शिक्षाएँ दिव्य ज्ञान पर आधारित हैं
    • किबला परिवर्तन — यह एक दिव्य आदेशित बदलाव है जो पैगंबरी की पुष्टि करता है
    • खुद पैगंबर ﷺ — उनका सम्पूर्ण अस्तित्व, जिसमें उनकी खुराक, पान, बोलना, चलना, सोना आदि शामिल हैं, सब अल्लाह की प्रेरणा से हैं।
      📌 पैगंबर ﷺ दिव्य सत्य का जिंदा रूप हैं। उनकी हर बात और हर काम त्रुटि रहित और पवित्र है।
      📝 पैगंबर ﷺ ने स्वयं कहा: “मेरी हर बात लिखो, क्योंकि इस मुँह से केवल सत्य निकलता है।”

🛑 शक के खिलाफ चेतावनी

  • यह आयत एक कड़ी चेतावनी भी देती है:
    • जब सत्य प्रकट हो चुका हो तो अपने दिल में कभी शक न आने दो।
    • कुरान, पैगंबर ﷺ, या किसी भी दिव्य आदेश जैसे किबला परिवर्तन पर शक रखना भटकाव का रास्ता है।
      🛡️ एक सच्चा ईमानदार व्यक्ति सत्य पर दृढ़ रहना चाहिए और अल्लाह द्वारा स्थापित मामलों में किसी प्रकार की हिचकिचाहट या संदेह से बचना चाहिए।

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