16. वे वही लोग हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही को खरीदा [32], लेकिन उनका यह सौदा उन्हें कोई फ़ायदा न दे सका, और यक़ीनन वे हिदायत का रास्ता पहचान न सके।
इनके सामने इस्लाम भी था और कुफ्र (इनकार) भी — लेकिन इन्होंने ईमान को एक सौदे की तरह देखा और हिदायत को बेचकर गुमराही खरीद ली।
👉 यह सौदा पूरी तरह नुकसान वाला रहा — ना इन्हें रूहानी फ़ायदा हुआ, और ना ये सही रास्ता पहचान सके।
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सूरह अल-बक़रा आयत 16 तफ़सीर