[86] यही वे लोग हैं जिन्होंने आख़िरत के बदले दुनिया की ज़िंदगी ख़रीद ली है। उनके लिए न तो सज़ा को हल्का किया जाएगा और न ही उनकी कोई मदद की जाएगी [160]।
इस आयत से दो अहम बातें साबित होती हैं:
जो यह कहे कि "मेरी कोई मदद नहीं है" — अगर यह यक़ीनी तौर पर कहा जाए, तो यह कुफ़्र की बात बन सकती है, क्योंकि सच्चे मोमिन कभी भी अल्लाह की मदद से महरूम नहीं होते।
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सूरह अल-बक़रा आयत 86 तफ़सीर