कुरान - 2:161 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَمَاتُواْ وَهُمۡ كُفَّارٌ أُوْلَـٰٓئِكَ عَلَيۡهِمۡ لَعۡنَةُ ٱللَّهِ وَٱلۡمَلَـٰٓئِكَةِ وَٱلنَّاسِ أَجۡمَعِينَ

अनुवाद -

161. "बेशक जो लोग काफ़िर हुए और काफ़िर ही मर गए [339], उन पर [340] अल्लाह की और फरिश्तों की और सारी दुनिया वालों की लानत है।"

सूरह अल-बक़रा आयत 161 तफ़सीर


[339] "जो काफ़िर हुए और काफ़िर ही मर गए..."

  • इसका मतलब है वे लोग जो ईमान नहीं लाए और अपनी ज़िन्दगी के अंत तक काफ़िरी (अक़ीदतन इनकार करने वाले) ही रहे।
  • लेकिन ध्यान रहे, हमें किसी को मौत के समय के हालात के बिना पक्का फैसला नहीं करना चाहिए।
  • अल्लाह ने कई जगहों पर इंसान की नियमित और न्यायपूर्ण तस्दीक की बात कही है।
  • यह लानत काफ़िर कर्मों पर है, न कि बेवजह किसी इंसान पर तुरंत निर्णय देने की बात।

👉 इसलिए हमें सावधानी से और रहमदिल होकर फैसले करने चाहिए।

[340] "उन पर अल्लाह, फरिश्तों और लोगों की लानत..."

  • यहाँ "लोगों" से मतलब आमतौर पर मुसलमानों की पूरी उम्मत (समुदाय) हो सकती है।
  • यानी, मुसलमान भी काफ़िरों की नापसंदगी जाहिर करते हैं।
  • या फिर क़यामत के दिन का जिक्र भी हो सकता है जब हर कोई अपने दुश्मनों पर लानत भेजेगा।
  • यह एक बहुत ही सख़्त चेतावनी है कि काफ़िरी की ज़िन्दगी और मौत दोनों की हालत नाज़ुक होती है।

👉 सबक़: ईमान रखना और उसे आख़िरी दम तक कायम रखना बहुत ज़रूरी है।

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