कुरान - 2:22 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ فِرَٰشٗا وَٱلسَّمَآءَ بِنَآءٗ وَأَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخۡرَجَ بِهِۦ مِنَ ٱلثَّمَرَٰتِ رِزۡقٗا لَّكُمۡۖ فَلَا تَجۡعَلُواْ لِلَّهِ أَندَادٗا وَأَنتُمۡ تَعۡلَمُونَ

अनुवाद -

22. (वही है) जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को फ़र्श बनाया [42] और आसमान को छत बनाया, और आसमान से पानी उतारा [43] और उस से तुम्हारे लिए फल पैदा किए रिज़्क़ के तौर पर
तो अल्लाह का किसी को शरीक न बनाओ, जबकि तुम जानते हो [44]।

सूरह अल-बक़रा आयत 22 तफ़सीर


[42] बारिश का निज़ाम — एक बड़ी नेमत

👉 अल्लाह ने हमें बताया कि वही ज़मीन को हमारे लिए आरामगाह बनाया
जिस पर हम चलते हैं, बैठते हैं, खेती करते हैं।

👉 और आसमान को एक छत (canopy) की तरह बनाया —
जो हमें तेज़ धूप, तूफ़ान और बाहरी नुक़सान से बचाता है

👉 फिर बताया कि बारिश सिर्फ़ ऊपर से आती है,
जो कि अल्लाह के बनाये हुए निज़ाम (system) से होती है —
गर्मी से भाप उठती है,
ठंडी से बादल बनते हैं,
और फिर बारिश बरसती है

👉 यह सिर्फ़ एक मख़लूक़ नहीं,
पूरी कायनात का मन्सूबा (planning) है,
जो सिर्फ़ अल्लाह की कुदरत से मुमकिन है।

[43] बारिश से फल — रोज़ी का ज़रिया

👉 अल्लाह ने सिर्फ़ पानी नहीं दिया —
बल्कि उस पानी से फल और खेती निकाली,
जो इंसान के लिए रिज़्क़ (रोज़ी) है।

👉 यह दिखाता है कि अल्लाह की रहमत चलती रहती है
सिर्फ़ पैदा करना नहीं,
बल्कि ज़िन्दगी को चलाना भी उसी का काम है।

[44] अल्लाह के साथ किसी को शरीक मत बनाओ

👉 अल्लाह फ़रमा रहा है:
"तो अल्लाह का किसी को शरीक न बनाओ जबकि तुम जानते हो"
यानी जब तुम्हें मालूम है कि ये सब नेमतें सिर्फ़ अल्लाह ने दी हैं,
तो फिर किसी और को उसका बराबर समझना बहुत बड़ा ज़ुल्म (नाइंसाफ़ी) है।

👉 शिर्क (अल्लाह के साथ किसी और को जोड़ना)
ये जान बूझकर हक़ को ठुकराना है।

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