[98] जो कोई अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसके रसूलों और जिबरील [188] और मीकाईल का दुश्मन हो, तो निश्चित ही, अल्लाह भी काफ़िरों का दुश्मन है। [189]
इस आयत से पता चलता है कि हज़रत जिबरील (अलैहिस्सलाम) को बहुत ऊँचा दर्जा हासिल है, क्योंकि उनका नाम सभी फ़रिश्तों में सबसे पहले लिया गया है।
इस क्रम से यह बात साफ़ होती है कि रूहानी मार्गदर्शन, भौतिक रोज़ी से श्रेष्ठ है, इसलिए जिबरील (अलैहिस्सलाम) को ऊँचा मुक़ाम मिला।
यह आयत यह सिखाती है कि अल्लाह के प्यारे रसूलों, फ़रिश्तों और नेक बंदों से मोहब्बत करना, दरअसल अल्लाह से मोहब्बत करना है।
इससे साबित होता है कि अल्लाह की मोहब्बत, उसके प्यारे बंदों की ताज़ीम और पैरवी से जुड़ी हुई है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 98 तफ़सीर