कुरान - 2:240 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

وَٱلَّذِينَ يُتَوَفَّوۡنَ مِنكُمۡ وَيَذَرُونَ أَزۡوَٰجٗا وَصِيَّةٗ لِّأَزۡوَٰجِهِم مَّتَٰعًا إِلَى ٱلۡحَوۡلِ غَيۡرَ إِخۡرَاجٖۚ فَإِنۡ خَرَجۡنَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمۡ فِي مَا فَعَلۡنَ فِيٓ أَنفُسِهِنَّ مِن مَّعۡرُوفٖۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٞ

अनुवाद -

240."तुममें से जो लोग मर जाएं और अपनी पत्नियाँ छोड़ जाएं, उन्हें अपने लिए एक वसीयत करना चाहिए [594], जिससे उनकी एक साल तक की आर्थिक सहायता सुनिश्चित हो [595], बिना उन्हें निकालने के। यदि वे अपने आप को वैध तरीके से बाहर जाने का निर्णय करती हैं [596], तो तुम उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए जिम्मेदार नहीं हो [597]। और अल्लाह पूरी तरह से ताकतवर, बुद्धिमान है।"

सूरह अल-बक़रा आयत 240 तफ़सीर


[594] वसीयत का आदेश और बाद में वसीयत क़ानून में परिवर्तन

  • इस आयत में पहले यह आदेश दिया गया था कि मृतक पति को अपनी पत्नी के लिए एक साल तक की वसीयत करनी चाहिए, जिसमें पत्नी को घर में रहकर आर्थिक सहायता दी जानी थी।
  • हालांकि, यह आदेश वसीयत क़ानून में बाद में आए बदलाव के कारण मंसूख (रद्द) हो गया। अब विधवा को उसके निश्चित हिस्से के हिसाब से संपत्ति मिलती है, और एक साल की देखभाल की वसीयत अनिवार्य नहीं रही।

[595] एक साल की आर्थिक सहायता की अनिवार्यता और उसकी समाप्ति

  • पहले यह आदेश था कि मृतक के परिवार को पत्नी को एक साल तक आर्थिक सहायता और आवास मुहैया कराना था। लेकिन इस नियम को बाद में ईदत के आदेश ने समाप्त कर दिया।
  • अब विधवा को चार महीने और दस दिन तक ईदत (मृत पति के बाद शोक मनाने का समय) का पालन करना होता है, और यदि वह गर्भवती है तो वह बच्चे के जन्म तक ईदत करती है।
  • इस नियम के अनुसार, अब मृतक पति के घर में एक साल तक रहने और वित्तीय सहायता की आवश्यकता नहीं रही।

[596] विधवा का घर छोड़ने का अधिकार (पूर्व में)

  • पहले, विधवा को यह विकल्प था कि वह:
    • अपने पति के घर में एक साल तक रहे और वित्तीय सहायता प्राप्त करे, या
    • यदि चाहें तो वह घर छोड़ सकती थी, और इस स्थिति में वारिसों का कोई और दायित्व नहीं था।
  • हालांकि अब यह आदेश मंसूख हो चुका है, फिर भी यह आयत यह दर्शाती है कि पत्नी को घर छोड़ने या रहने का निर्णय लेने का अधिकार था।

[597] ईदत के बाद वैध कार्य — सजावट और पुनर्विवाह

  • ईदत समाप्त होने के बाद, विधवा को यह अधिकार था कि वह:
    • खुद को सुंदर बनाए,
    • शोक को समाप्त करे,
    • और पुनर्विवाह की तैयारी करे।
  • पहले की स्थिति में, एक साल तक की सहायता वैकल्पिक थी, अनिवार्य नहीं। यदि विधवा चाहती तो वह इस सहायता को त्याग सकती थी।
  • हालांकि, यदि विधवा घर में रहती थी, तो वारिसों का दायित्व था कि वह उसकी देखभाल करें।

इस आयत में विधवा के अधिकारों और उनके लिए रखी गई वसीयत से जुड़ी कुछ पहलुओं को स्पष्ट किया गया है। हालांकि समय के साथ इस आदेश में बदलाव आया है, फिर भी यह हमें यह सिखाता है कि विधवा की देखभाल और उनका अधिकार ईदत के बाद भी महत्वपूर्ण था।

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