कुरान - 2:67 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦٓ إِنَّ ٱللَّهَ يَأۡمُرُكُمۡ أَن تَذۡبَحُواْ بَقَرَةٗۖ قَالُوٓاْ أَتَتَّخِذُنَا هُزُوٗاۖ قَالَ أَعُوذُ بِٱللَّهِ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡجَٰهِلِينَ

अनुवाद -

[67] और याद करो जब मूसा [123] ने अपनी क़ौम से कहा: "बेशक, अल्लाह तुम्हें एक गाय ज़बह (क़ुर्बानी) करने का हुक्म देता है।" [124] उन्होंने कहा: "क्या आप हमारा मज़ाक बना रहे हैं?" [125] मूसा ने कहा: "मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ कि मैं जाहिलों (अज्ञानी) में से हो जाऊँ।"

सूरह अल-बक़रा आयत 67 तफ़सीर


[123] मूसा ने क़ौम से यह क्यों कहा?

  • एक आदमी 'आमील' ने अपने अमीर रिश्तेदार को मार डाला और उसकी लाश एक दूसरी बस्ती में छुपा दी
  • फिर उस बस्ती पर झूठा इल्ज़ाम लगाकर ख़ून-बहा (blood money) माँगने लगा।
  • जब हक़ीक़त सामने लाना मुश्किल हो गया, तब अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को हुक्म दिया कि वो अपनी क़ौम से कहें — "एक गाय ज़बह करो", ताकि अल्लाह क़ातिल का पता दिखाए।

[124] क़ुर्बानी का हुक्म और पहले की उम्मतें

  • यह साबित करता है कि गाय की क़ुर्बानी का हुक्म पहली उम्मतों में भी था।
  • हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने भी फ़रिश्तों के सामने बछड़ा पेश किया था।
  • इससे मालूम होता है कि क़ुर्बानी अल्लाह का एक क़दीमी हुक्म है, जो हज़रत मुहम्मद ﷺ से पहले भी मौजूद था।

[125] बनी इस्राईल की बेहूदगी और नबी की पाकीज़गी

  • बनी इस्राईल ने कहा: "क्या आप हमारा मज़ाक बना रहे हैं?"
  • यह बहुत ग़लत और अदब से खाली जवाब था — अल्लाह के नबी से ऐसा सोचना भी गुनाह है।
  • मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा: "मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ कि मैं जाहिलों में से हो जाऊँ।"
  • यानी नबी कभी मज़ाक या चालाकी नहीं करता — उसकी हर बात अल्लाह के हुक्म से होती है।

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