159. "बेशक जो लोग [335] हमारे नाज़िल किए हुए रौशन सबूतों और हिदायत को छुपाते हैं [336], उस के बाद कि हम उसे किताब में लोगों के लिए वाज़ेह कर चुके होते हैं [337], उन पर अल्लाह की लानत है और तमाम लानत करने वालों की भी लानत है।"
👉 सबक़: जो लोग हक़ बात जानते हुए भी छुपाते हैं, वो सख़्त गुनाह के मुर्तकिब होते हैं।
👉 सबक़: दीन की असली बातों को छुपाना या बदलना, बहुत बड़ा गुनाह है, चाहे जानबूझकर हो या किसी लालच या डर से।
👉 इसका मतलब ये है कि इल्म और हक़ छुपाना तब और बड़ा गुनाह बन जाता है जब उसे खुलकर लोगों तक पहुँचाना अल्लाह की तरफ़ से ज़िम्मेदारी हो।
👉 यह बताने के लिए है कि इल्म छुपाने का गुनाह सिर्फ़ दुनियावी नहीं, बल्कि आख़िरत में भी भारी सज़ा वाला है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 159 तफ़सीर